भारतवर्ष में जन्म लेने पर मुझे गर्व है, भारतवर्ष में हिन्दू परिवार में जन्म हुआ परन्तु मैं शर्मिंदा हुं मेरा जन्म भारतवर्ष में हुआ सच कहुं तो ये असली वजह नहीं है आकिकत कड़वी जरूर है पर सच हमेशा कड़वा ही होता है भारतवर्ष में जन्म लेने पर मुझे गर्व है पर ये गर्व उस वक़्त धुमिल हो जाता है जब मेरे नाम के साथ हिन्दू जुड़ता है, सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग अपनी सत्ता हांसिल करने के लिए भोली भाली जनता को गुमराह करते चले आ रहे हैं, राम मंदिर अरे पहले से ही इतने मंदिर हैं की आम इंसान का जीवन भी बीत जाये पर वह अपने सर पर अपनी छत बना पाने में असमर्थ है वहीं दुसरी ओर हिन्दूयों के हिताशी बताने वाले शानदार विदेशी गाडियों के काफिले के साथ चलते नजर आ ही जाते है नाम आश्रम का पर सवाल उठता है वो कितने एकण में समाया है और उसके अन्दर कितने गरीबों को सहारा मिल रहा है, कितने भूखे गरीब धुखियारे और बिमारीयों से ग्रस्त इन्सानों के लिए सुविधा उपलब्ध कराई जाती है....वहां क्या होता है इस पर किसी तरह की टिप्णी नहीं देना चहुगं परन्तु जनता के समक्ष हाल में हुए खुलासे धुंधले नहीं पड़े होंगें, और आप कितना इंसानियत का खून करना चाहते हैं 50-50 रूपए और खाना दे कर भूखे गरीबों को पकड़ा दिया अपना झंडा और लगा के नारा बन गए महाराज, और कौन है जो प्यार से नहीं मान रहा, ये पत्थर फिकवाने के पीछे भी आप हैं, इतिहास गवाह है, कि आज तक हिन्दू मुस्लिम के दंगे में आप बड़े लोगों और आपके परिवार के सदस्यों को कभी कोई हानि नहीं पहुंची | और कितना बटवारा करना चाहते हैं आप हिन्दुस्तान कि अवाम को दो पक्षों में आपने बांटा इतनी नफरत भर दी कि बच्चे देश कि एक ही सीमा को सबसे पहले जन्तें हैं | पकिस्तान और हिन्दुस्तान आपके द्वारा किये गए कुछ अतभुत कार्यों को कलम के जरिए शब्दों में पिरोने कि कोशिस मात्र करी है पहला चरण: जाति को दो पक्षों में आपने बांटा नामकरण हुआ जातिवाद फिर क्षेत्र बटवारा हाल में आमची मुंबई का नारा सफल रहा नामकरण हुआ क्षेत्रवाद , ऐसे और भी है जैसे आतकंवाद ये आतंकवाद तो होना ही था और उसकी वजह थी आप सिर्फ आप.....
नहीं है जरूरत इसे किसी के नाम कि यही है जड़ उस शीतल हरे भरे वृक्ष की जिसमे टहनी ही मात्र रह गई नोच गए अपने फ़ाएदे के वो सत्ता लोभी खुद कि साफ़ छवि जन हितैषी साबित करने निकल पड़े जनता के पास लगा के नारा करके बुलंद अपनी आवाज कर के दिखा देगें फिर से हरा भरा इसी सूखे वृक्ष को और मन में लिए लालसा टहनी है अभी शेष उस सूखे वृक्ष में अब देखो इसकी बारी भी आयी, ये कैसी है लालच इनमे समायी भूल कर सब कुछ बन बैठे ये अनुनायी नहीं है कुछ और इनका ही है सब, अवाम को सुनाने कि कसम है मैंने खायी : भाइयों जागो और देखो यही हैं | भगवा-वाद ........भगवा-वाद .......भगवा-वाद ........
यही है सबसे खतरनाक डरना है हमें तो है ये आतंकवाद से भी खतरनाक घरों में छिप जाओ या फिर दो उनको ऐसा जवाब आने वाली पीढ़ी जी सके अमन के साथ गर्व से याद करके ले तुम्हारा नाम |