जहाँ उत्तर प्रदेश में लोगों को तापमान में
आयी गिरावट से शर्द मौसम में ठिठुरता बुरा हाल नजर आ रहा है वहीँ उत्तर प्रदेश की राजनीति का पारा चड़ता ही दिख रहा है और आगामी लोकसभा चुनाव तक मानसून के
अभिलेख (रेकार्ड) की तरह पिछले सारे (रेकार्ड) अभिलेखों को
तोड़ देना वाला है वैसे तो हर लोक सभा चुनाओ में कुछ ऐसा ही हाल देखने को
मिलता है पर आगामी लोक सभा चुनाव कई कारणों से ज्यादा रोचक होने वाला पर यहाँ हम
किसी तरह की धांधली पर चर्चा नहीं करने वालें हैं। आइये आगामी लोक सभा चुनाव के
कुछ ख़ास रोचक तत्वों पर रौशनी डालते हैं । वैसे
तो परिवारवाद राजनीति में कोई नई बात नहीं रही पर ये चुनाव कई माएनो मेँ भारतवर्ष की राजनीतिक परिभाषा को बदल कर रखने में कारगर साबित होगा एक तरफ कांग्रेस
के युवराज राहुल
गांधी तो अपने कड़े फैसलों और एक के बाद एक नई योजनायों का तोहफा देते युवा मुख्य मंत्री श्री अखिलेश यादव
ने उत्तर प्रदेश
में अपनी छवि अपने कार्यों से दमदार आगाज़ किया है, अभी तक के
कार्यकाल में एक भावी नेता की छवि जनता के सामने प्रस्तुत की है तो वहीं दुसरी ओर
युवराज श्री राहुल गांधी सरकार के भ्रष्टाचार से निकलने के विफल प्रयास करने में
व्यस्त नजर आ रही है, अगर यही हाल रहा तो उत्तर प्रदेश में
युवराज पार्टी लोकसभा चुनाओं की दौड़ से ही बहार हो सकती है क्योंकि उत्तर प्रदेश
में केवल दो जिलों नहीं है प्रदेश की जनता वो मुर्खता दोहराना नहीं चाहेगी,
हर बार की तरह इस बार युवराज ट्रम्प कार्ड नहीं चलने वाला जनता भूली
नहीं की चुनाव के पूर्व जोर शोर से रैली करना दलित के घर रहना और चुनाव बाद विदेश
में समय बिताना ये प्रदेश की जनता की भूल थी जो उसने युवराज की राजनीति में परिपक्व
माना शायद युवराज खुद भी ये बात अच्छी तरह से जानते हैं तभी सरकार में पद लेने के
अपने फैसले से कदम पीछे कर लिया पर ये फैसला जनता की समझ से परे है |
लेख:- ई० स्वप्निल मालवीय