Saturday, 5 January 2013

तापमान में आयी गिरावट वहीँ उत्तर प्रदेश की राजनीति का पारा चड़ा


जहाँ उत्तर प्रदेश में लोगों को तापमान में आयी गिरावट से शर्द मौसम में ठिठुरता बुरा हाल नजर आ रहा है वहीँ उत्तर प्रदेश की राजनीति का पारा चड़ता ही दिख रहा है और आगामी लोकसभा चुनाव तक मानसून के अभिलेख (रेकार्ड) की तरह पिछले सारे (रेकार्ड) अभिलेखों को तोड़ देना वाला है वैसे तो हर लोक  सभा चुनाओ में कुछ ऐसा ही हाल देखने को मिलता है पर आगामी लोक सभा चुनाव कई कारणों से ज्यादा रोचक होने वाला पर यहाँ हम किसी तरह की धांधली पर चर्चा नहीं करने वालें हैं। आइये आगामी लोक सभा चुनाव के कुछ  ख़ास रोचक तत्वों पर रौशनी डालते हैं । वैसे तो परिवारवाद राजनीति में कोई नई बात नहीं रही पर ये चुनाव कई माएनो मेँ भारतवर्ष की राजनीतिक परिभाषा को बदल कर रखने में कारगर साबित होगा एक तरफ कांग्रेस  के  युवराज  राहुल  गांधी तो अपने कड़े फैसलों और एक के बाद एक  नई योजनायों का तोहफा देते युवा मुख्य मंत्री श्री अखिलेश यादव  ने  उत्तर  प्रदेश में अपनी छवि अपने कार्यों से दमदार आगाज़ किया है, अभी तक के कार्यकाल में एक भावी नेता की छवि जनता के सामने प्रस्तुत की है तो वहीं दुसरी ओर युवराज श्री राहुल गांधी सरकार के भ्रष्टाचार से निकलने के विफल प्रयास करने में व्यस्त नजर आ रही है, अगर यही हाल रहा तो उत्तर प्रदेश में युवराज पार्टी लोकसभा चुनाओं की दौड़ से ही बहार हो सकती है क्योंकि उत्तर प्रदेश में केवल दो जिलों नहीं है प्रदेश की जनता वो मुर्खता दोहराना नहीं चाहेगी, हर बार की तरह इस बार युवराज ट्रम्प कार्ड नहीं चलने वाला जनता भूली नहीं की चुनाव के पूर्व जोर शोर से रैली करना दलित के घर रहना और चुनाव बाद विदेश में समय बिताना ये प्रदेश की जनता की भूल थी जो उसने युवराज की राजनीति में परिपक्व माना शायद युवराज खुद भी ये बात अच्छी तरह से जानते हैं तभी सरकार में पद लेने के अपने फैसले से कदम पीछे कर लिया पर ये फैसला जनता की समझ से परे है |
                                                                                                                                                                                                                    लेख:-  ई० स्वप्निल मालवीय


जागो जन तो कभी जागो कितने और दिन ?


जागो जन तो कभी जागो कितने और दिन ?
जागो - जागो – जागो, कभी अन्ना ने कहा, हमने भी कहा करके बुलंद अपनी आवाज़ जागो - जागो, का लगा डाला नारा  कभी आतंकवाद पर लगाया, कभी किसी बच्चे की मौत पर तो कभी किसी महिला के साथ हुए दुष्कर्म के लिए लेकिन ये जागो भारत जागो का नारा एक दिन, दो दिन, एक सप्ताह या एक महीना अरे बंद करो पीछे चलना जगा कर खुद की सोच समझ न सिर्फ कहो, ना सिर्फ सुनो, ना सुनायो, ना कुछ बनाऒ, ना रह जाना बनके श्रोता किसी नेता या अभिनेता के उपदेशों का शिकार, बस बहुत कर लिया श्रोता का किरदार, मत तलाशो कोई सेनापती, युद्ध नहीं है किसी और का, और नहीं है कोई योध्या, और ना है शूरवीर, युद्ध है सिर्फ तुम्हारा मत करो अपने कदमों को पीछे, उठाओ इतिहास और देखो शूरवीरों की कहानी, आज तुम ही हो महाराणा प्रताप, चंद्रशेखर आजाद, सुभाषचन्द्र बोस... ये मत भुलना कभी ये भी थे आम इंसान इनके विचारों ने नहीं बनाया इनको महान किये थे इन्होने कुछ अतभुत प्रयास जो बन गया इतिहास, बस मत सोचों, मत देखो, मत करो और ना करो अब किसी का इंतज़ार सारे सवालों के जवाब के लिए करना है बस तुमको ही प्रयास, चलते चलते कब तुम से बनेगें हम और हम से हम सब, बस चल पड़ो इस सपने को करने सकार, जब आये कठनाई बस कर लेना याद ये वही है संसार जहाँ खुद की शक्ति भूल गए थे भगवान श्री हनुमान, तो तुम तो हो एक आम इंसान, चल पड़ो बनाओ ऐसा पथ आने वाली पीड़ी को दे कर जाओ एक अनोखी सौगात, याकिन मनो मुझे है पूरा विस्वास लहराओगे विजय ध्वज बनाओगे इतिहास बस करना है ये याद तुम ही हो सेनापती तुम ही योध्या और तुम्ही हो शूरवीर कर जाओ ऐसा काम, तुम से हम और हम से हम सब होगें जरूर पर करना है एक प्रयास, नहीं है युद्ध किसी महिला पर किये गए अत्याचार का ये है कदम एक बड़े बदलाव का, एक बड़े बदलाव का ||
                                                                                                                  लेख:-  ई० स्वप्निल मालवीय