Wednesday, 16 January 2013

गूगल पर सरकार द्वारा सेनसर बोर्ड गठन पर मेरे व्यक्तिगत विचार


मैं, ई० स्वप्निल मालवीय निवासी इलाहाबाद उ० प्र० |
         भारतीय संविधान द्वारा प्राप्त भारतीय नागरिक के सवैंधानिक अधिकार का उपयोग करते हुये, गूगल पर सरकार द्वारा सेनसर बोर्ड गठन पर मेरे व्यक्तिगत विचार | सर्वप्रथम समस्त मा० नेतागण को धन्यवाद! एक बार फिर समस्त मा० नेतागण ने अपनी एकता का उदाहरण देश के हर आम नागरिकों को देने में कामयाबी हांसिल कर ली और जब जब संसद हो या विधान सभा जहाँ पर नेताओं के फायेदे की बात पर सभी की एकता का अत्भुत परिचय देखते ही बनता है, लेकिन जहाँ बात आम इंसान के लिए पारित होने वाले कानून की हो या किसी विकास की वहाँ पर होने वाली आम बहस को  युद्ध में तपदील करने में तनिक भी देरी नहीं करते |  हमारे मा० नेतागण ने फिर एक बार नैतिकता, भारतीय सभ्यता और संस्कृति के अधार पर आम जनता की स्वतंत्रता का हनन करने की पूण तैयारी कर ली है, पर एक आम नागरिक के अधिकार से एक सवाल जरूर पुछना रहा हुँ, क्या आप सभी इतने चिन्तित हैं, हमारी भारतीय सभ्यता और संस्कृति के लिये, यदि हाँ, तो सबसे पह्ले सेनसर लोकसभा, राज्यसभा ऐवं देश की अन्य विधान सभा पर सेनसर की जरूरत है, जिस तरह की सभ्यता, और भाषा का उपयोग किया जाता है, उससे हमारी भारतीय सभ्यता और संस्कृति का परिचय ना सिर्फ भारत में बल्की सम्सत विश्व में  प्रदर्शित होता है, लेकिन शायद इस पर कभी सेनसर नहीं लग पाये, बस अब बहुत हो गया जिस दिन पब्लिक ने ये शब्द कह दिये उस समय वोट मागंने पहुँचे ..... क़माल होगा|
“पहले अपना घर तो साफ कर लो तब दुसरे की गन्दगी के बारे में विचार |

                                                                 धन्यवाद