Saturday, 5 January 2013

जागो जन तो कभी जागो कितने और दिन ?


जागो जन तो कभी जागो कितने और दिन ?
जागो - जागो – जागो, कभी अन्ना ने कहा, हमने भी कहा करके बुलंद अपनी आवाज़ जागो - जागो, का लगा डाला नारा  कभी आतंकवाद पर लगाया, कभी किसी बच्चे की मौत पर तो कभी किसी महिला के साथ हुए दुष्कर्म के लिए लेकिन ये जागो भारत जागो का नारा एक दिन, दो दिन, एक सप्ताह या एक महीना अरे बंद करो पीछे चलना जगा कर खुद की सोच समझ न सिर्फ कहो, ना सिर्फ सुनो, ना सुनायो, ना कुछ बनाऒ, ना रह जाना बनके श्रोता किसी नेता या अभिनेता के उपदेशों का शिकार, बस बहुत कर लिया श्रोता का किरदार, मत तलाशो कोई सेनापती, युद्ध नहीं है किसी और का, और नहीं है कोई योध्या, और ना है शूरवीर, युद्ध है सिर्फ तुम्हारा मत करो अपने कदमों को पीछे, उठाओ इतिहास और देखो शूरवीरों की कहानी, आज तुम ही हो महाराणा प्रताप, चंद्रशेखर आजाद, सुभाषचन्द्र बोस... ये मत भुलना कभी ये भी थे आम इंसान इनके विचारों ने नहीं बनाया इनको महान किये थे इन्होने कुछ अतभुत प्रयास जो बन गया इतिहास, बस मत सोचों, मत देखो, मत करो और ना करो अब किसी का इंतज़ार सारे सवालों के जवाब के लिए करना है बस तुमको ही प्रयास, चलते चलते कब तुम से बनेगें हम और हम से हम सब, बस चल पड़ो इस सपने को करने सकार, जब आये कठनाई बस कर लेना याद ये वही है संसार जहाँ खुद की शक्ति भूल गए थे भगवान श्री हनुमान, तो तुम तो हो एक आम इंसान, चल पड़ो बनाओ ऐसा पथ आने वाली पीड़ी को दे कर जाओ एक अनोखी सौगात, याकिन मनो मुझे है पूरा विस्वास लहराओगे विजय ध्वज बनाओगे इतिहास बस करना है ये याद तुम ही हो सेनापती तुम ही योध्या और तुम्ही हो शूरवीर कर जाओ ऐसा काम, तुम से हम और हम से हम सब होगें जरूर पर करना है एक प्रयास, नहीं है युद्ध किसी महिला पर किये गए अत्याचार का ये है कदम एक बड़े बदलाव का, एक बड़े बदलाव का ||
                                                                                                                  लेख:-  ई० स्वप्निल मालवीय